कुमुदिनीचन्द्र का सामाजिक मूल्यांकन
Keywords:
योगीवेषधारी, ईश्वरनिष्ठा, विलासोद्यान, पत्नीव्रतधारी।Abstract
कवि और समाज दोनों का परस्पर गूढ सम्बन्ध रहा है। कवि की रचनाओं पर तत्कालीन संस्कृति, समाज इत्यादि का प्रभाव स्पष्टतया दिखायी देता है। किसी भी युग की सामाजिक जानकारी प्राप्त करने हेतु हमें काव्यों की सहायता लेनी पड़ती है। संस्कृत साहित्य में भी वैदिककाल से लेकर आधुनिक काल तक अनेकों कवियों ने अनेकों सुप्रसिद्ध रचनाओं का प्रणयन किया है, जो उस समय के समाज की जानकारी देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। काव्यों के माध्यम से ही हम तत्कालीन समाज का मूल्यांकन कर पाते है। आधुनिक संस्कृत साहित्य में पण्डिता क्षमाराव, टी. गणपति शास्त्री, राधावल्लभ त्रिपाठी इत्यादि आधुनिक मनीषियों के द्वारा कविता, नाटक, कहानी, उपन्यास इत्यादि विधाओं का प्रणयन किया गया, जो आधुनिक समाज की छवि को दर्शाती है। आधुनिक कवियों में बीसवी शताब्दी में उत्पन्न आचार्य मेधाव्रत द्वारा रचित उपन्यास 'कुमुदिनीचन्द्र' तत्कालीन समाज का वास्तविक स्वरुप दर्शाता है। इस शोधपत्र में कुमुदिनीचन्द्र में वर्णित समाज का मूल्यांकन करने की कोशिश की जायेगी।


